पंकज प्रसून देश के लोकप्रिय व्यंग्यकार और कवि हैं, जिन्होंने लाल क़िले के काव्य-मंच से लेकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय तक अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। इनकी कई कविताएँ सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। सैकड़ों कवि सम्मेलन और तमाम टीवी शोज में उपस्थिति दर्ज कराई है।
इन्हें महज़ 33 साल की उम्र में ही उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान से दो बार सम्मान मिला— वर्ष 2014 का ‘डॉ. रांगेय राघव पुरस्कार’ व वर्ष 2018 का ‘के.एन. भाल पुरस्कार’। इन्हें उत्तरप्रदेश भाषा संस्थान के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘उत्तरप्रदेश भाषा सम्मान’ 2020 से भी नवाज़ा जा चुका है। वर्ष 2019 में इंडिया टुडे ने प्रसून को कला और संस्कृति के क्षेत्र के टॉप 33 प्रतिभाशाली युवाओं में शामिल किया था। पंकज प्रसून की पाँच कविताओं को अनुपम खेर ने अपनी आवाज़ दी है। वर्ष 2023 में फिजी में आयोजित ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य बनाए गए थे। इसी वर्ष उत्तरप्रदेश सरकार का प्रथम ‘गोपाल दास नीरज स्मृति सम्मान’ प्राप्त हुआ है। परमाणु ऊर्जा पर कविता की पहली किताब लिखने के लिए ‘एशिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स’ में नाम दर्ज है। उनकी प्रकाशित पुस्तकें ‘जनहित में जारी’, ‘लड़कियाँ बड़ी लड़ाका होती हैं’, ‘सच बोलना पाप है’, ‘द लंपटगंज’, ‘हँसी का पासवर्ड’, ‘तब गीतों से साथ निभाया’, ‘गूलर वाली कुसमा’, ‘परमाणु की छाँव में’, ‘पंच प्रपंच’, ‘मेरे प्रतिबिंब’ (संपादन) है।