26 सालों से लगातार मीडिया में अपनी बेबाकी और प्रयोगधर्मिता के लिए मशहूर अनुरंजन झा चम्पारण, बिहार के छोटे-से गाँव फुलवरिया से आते हैं। सामाजिक भ्रष्टाचार को बेनकाब करने के जुनून की वजह से तीस से कम की उम्र में ‘इंडिया न्यूज’ के न्यूज़ डायरेक्टर और फिर सीएनईबी के प्रधान संपादक-सीओओ बने। दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास स्नातक की शिक्षा के दौरान ही देश के तमाम अख़बारों-पत्रिकाओं के लिए लिखना शुरू किया। बाद में आईआईएमसी से पत्रकारिता की डिग्री ली। करियर की शुरुआत ‘जनसत्ता’ से हुई। फिर ‘ज़ी न्यूज़’, ‘आजतक’ होते हुए ‘इंडिया टीवी’ लॉन्च करने में मुख्य भूमिका निभाई।
देश का पहला मैट्रोमोनियल चैनल ‘शगुन टीवी’ को शुरू करने का श्रेय भी अनुरंजन झा को ही जाता है। फ़िलहाल ब्रिटिश संस्था ‘गाँधियन पीस सोसायटी’ के चेयरमैन हैं और इंग्लैंड में रहते हुए भारत-यूरोप संबंधों पर शोधरत हैं। पहली किताब ‘रामलीला मैदान’ के ज़रिए अन्ना आंदोलन की असलियत बताई, फिर ‘गाँधी मैदान’ से बिहार की राजनीति और ‘कुर्सी के खेल’ को खोजने की कोशिश की उसके बाद ‘झूम’ से बिहार में शराबबंदी का सच बताया। ‘हक़ीक़त नगर’ उनका पहला फ़िक्शन उपन्यास है, इसमें उन्होंने नब्बे के दशक के दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के जीवन, उनके सपने, प्रेम और इन सबके बीच बदलते देश की परिस्थितियों को छूने की कोशिश की।