काम और जज़्बात के बीच हिलकोरे मारता एक लापरवाह, अल्हड़ और अराजक घुमक्कड़। सराय-सीएसडीएस के साथ मीडिया, शहर, बाज़ार और श्रम पर माथापच्ची और ‘मीडियानगर’ शृंखला के संपादन में आठ-दस बरस खपाये। कुछेक बरस वनाधिकारों के मसले पर ‘फेयाड़ा’ और शहरी बेघरी पर ‘हमशहरी’ की एडिटरी भी की। नौकरी-चाकरी के अंतिम कुछ महीने कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन्स, मीडिया मैनेजमेंट और पीआरगीरी की। लिखने-विखने का फ़ितूर। ‘बम संकर टन गनेस’ उसी का बाईप्रोडक्ट।
जेंडर आधारित दुर्व्यवहार और हिंसा वाले भारतवर्ष के जेंडर-चिंतन और इसकी निर्मिति समझने के लिए मार्च 2014 से दिसंबर 2018 तक भारत के 21 राज्यों में 27,700 किलोमीटर की ‘Ride for Gender Freedom’ नामक साइकिल यात्रा। विगत छह बरसों से अपने गाँव शहीदग्राम तरियानी (छपरा) में जैविक खेती के साथ-साथ प्रकृति और जीवन कौशल पर आधारित शिक्षण केंद्र ‘बागमती विद्यापीठ’ की स्थापना का प्रयास।