बहुमुखी प्रतिभा की धनी एकता नाहर अंधेरे में से रोशनी छानकर लाने वाली कवयित्री हैं। सन 2011 में भोपाल से बी.ई. की डिग्री लेने के बाद इन्होंने कई कंपनियों में नौकरी की, परंतु साहित्य से लगाव के कारण इनका मन कहीं नहीं लगा। इसके बाद दैनिक भास्कर के साथ जर्नलिज़्म को अपना पेशा बनाया। बड़ी ही बेबाकी से अपनी बात कहने वालीं एकता के ब्लॉग और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कई प्रशंसक हैं। इनकी कविताओं में अलग ही तरह का नशा है, जो पाठकों को अपने अंदर का अहसास लगता है।
बचपन से ही अपने क्षेत्र दतिया (म.प्र.) के कवि सम्मेलनों में मार्मिक विषयों पर कविता सुनाने वालीं एकता की लिखी हुई कविताओं को कई पत्र-पत्रिकाओं ने शामिल किया।
इनके आकर्षक चेहरे और मुस्कान को देखकर इनकी कविताओं के विषय और गहराई का अनुमान लगा पाना असंभव है। ये एक अच्छी स्केच आर्टिस्ट और नेल आर्टिस्ट भी हैं। फ़िलहाल ‘पत्रिका समाचार’ में कार्यरत हैं।