मुदित फ़िलहाल भोपाल में रहते हैं। जन्म खंडवा (म.प्र.) में हुआ और पढ़ाई-लिखाई छिंदवाड़ा में। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने भोपाल आए तो भोपाल में ही रम गए। कला, साहित्य और संस्कृति से रिश्ता भोपाल में ही गहराया। सिविल इंजीनियर की नौकरी के दौरान उन्हें कांक्रीट से नफ़रत होने लगी और उन्होंने अपना पेशा बदल दिया। वर्तमान में वे टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र, भोपाल की त्रैमासिक पत्रिका ‘रंग संवाद’ में सहायक संपादक हैं।
कोविड-लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘निम्बोली क्रिएटिव्स’ नाम की संस्था शुरू की जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी के लिए लिखने-पढ़ने का मज़ेदार माहौल तैयार करना है। यह संस्था बच्चों, युवाओं और शिक्षकों के लिए देश भर में संवनात्मक लेखन कार्यशालाओं का लगातार आयोजन कर रही है। ‘तभी हमने अपना पेड़पन खो दिया’ (कविता-संग्रह) उनकी नवीनतम पुस्तक है।