कार्यक्रम विवरण

20 सितम्बर (शनिवार)
10:00 से 10:10
20 सितम्बर, शनिवार
दीप प्रज्ज्वलन / शुभारंभ

मुख्य अतिथि के साथ उत्सव का शुभारंभ होगा।

10:10 से 12:30
20 सितम्बर, शनिवार
छत्तीसगढ़ कैंपस कविता

हिन्दवी की प्रस्तुति

बाबुषा कोहली, आनंद बहादुर, नरेश सक्सेना, आलोक आज़ाद

12:30 से 12:40
20 सितम्बर, शनिवार
रामनामी

रामनामी समुदाय द्वारा

12:40 से 12:50
20 सितम्बर, शनिवार
विनोद कुमार शुक्ल का पुत्र होना

शाश्वत गोपाल

12:50 से 13:20
20 सितम्बर, शनिवार
हमारे विनोद जी

विनोद कुमार शुक्ल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित वृत्तचित्र के एक अंश की स्क्रीनिंग

आलोक पुतुल, देवेन्द्र शुक्ल

13:20 से 14:00
20 सितम्बर, शनिवार
ज़ख़्म से ज़ुबान तक

एक दलित की आत्मकथा

सरवर कुमार चहल से राकेश कुमार सिंह की बातचीत

14:00 से 14:15
20 सितम्बर, शनिवार
‘सहर’ का विमोचन

हिमांशु गुप्ता ‘सहर’ के पहले कविता-संग्रह ‘सहर’ का लोकार्पण

14:15 से 15:00
20 सितम्बर, शनिवार
कविता का नया समय

नए पाठकों और डिजिटल युग में कविता-संग्रहों की बढ़ती लोकप्रियता

पूजा राय, रोहित कुमार, मुकेश कुमार सिन्हा, अंकुश कुमार

15:00 से 15:30
20 सितम्बर, शनिवार
‘कहानियों का कहानियाँना’ का विमोचन

विनोद कुमार शुक्ल के कहानी-संग्रह ‘कहानियों का कहानियाँना’ का लोकार्पण

15:30 से 16:00
20 सितम्बर, शनिवार
हिंदी साहित्य का शुक्ल पक्ष

छह महीनों में 30 लाख — हिंदी साहित्य में संभव हुआ असंभव

नरेश सक्सेना, विनोद कुमार शुक्ल

16:00 से 16:45
20 सितम्बर, शनिवार
हिंदी साहित्य के आउटसाइडर

क्या हिंदी में बाहर से आए लेखक ही सबसे नया और ताज़ा लिख रहे हैं?

सुशील कुमार, आनंद कश्यप, अश्वनी प्रताप, मानस भारद्वाज

16:45 से 17:00
20 सितम्बर, शनिवार
‘गाँवखेड़ा मौहाभाठा’ का विमोचन

संजीव बख्शी के उपन्यास ‘गाँव खेड़ा मौहाभाठा’ का लोकार्पण

17:00 से 17:40
20 सितम्बर, शनिवार
पंडवानी

चेतन देवांगन एवं साथी

17:40 से 18:20
20 सितम्बर, शनिवार
जुर्म, जाँच और जिज्ञासा

सस्पेंस और रहस्य का बदलता स्वाद — हिंदी पाठकों की पसंद

जयंती रंगनाथन, रणविजय, के डी सिंह, संजय शेफ़र्ड

18:20 से 19:00
20 सितम्बर, शनिवार
क्या लिखना सिखाया जा सकता है?

क्यों आ गई हैं राइटिंग वर्कशॉप की बाढ़

मोहित, हेना नकवी, विनीता अस्थाना, कोशलेन्द्र मिश्र, लोकेश गुलयानी

19:00 से 20:00
20 सितम्बर, शनिवार
जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे

शब्द और सुर
चिन्मयी त्रिपाठी, जोएल मुखर्जी

20:00 से 20:30
20 सितम्बर, शनिवार
इश्क़ बग़ावत

प्यार में हल्ला बोल

रितेश रजवाड़ा

20:30 से 22:00
20 सितम्बर, शनिवार
उलगुलान शो

डिकोडिंग द डिवाइड

नीलोत्पल मृणाल

21 सितम्बर (रविवार)
10:00 से 10:45
21 सितम्बर, रविवार
रील्स, रिव्यू और रीडिंग

क्या इंस्टाग्राम और यूट्यूब हिंदी साहित्य के नए पुस्तक मेले हैं?

अर्पित आर्या, रेणु मिश्रा, मधु चतुर्वेदी, उज्ज्वल मल्हावनी

10:45 से 11:30
21 सितम्बर, रविवार
स्त्री लेखन : दोहरी दुनिया का सफ़र

कैसे महिलाएँ लेखन को जीवन और ज़िम्मेदारियों के साथ गूँथती हैं

सुषमा गुप्ता, अंकिता जैन, चित्रा पंवार, ज्योति शर्मा, मुदिता शर्मा

11:30 से 12:40
21 सितम्बर, रविवार
चार फूल हैं और दुनिया है की स्क्रीनिंग

अचल मिश्रा, निहाल पराशर

12:40 से 13:25
21 सितम्बर, रविवार
साठ सेकंड की कहानियाँ

रील्स और शॉर्ट वीडियो के ज़माने में साहित्य की नई यात्रा

अंजली मिश्रा, सर्वेन्द्र विक्रम सिंह, पूनम पूर्णाश्री, शिवोहम

13:25 से 14:10
21 सितम्बर, रविवार
बड़े पर्दे का छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ी सिनेमा — कहाँ से चले, कहाँ तक पहुँचे, कहाँ जा रहे हैं?

मनोज वर्मा, ऋचा ठाकुर, मीर अली मीर, गौरव गिरिजा शुक्ला

14:10 से 15:10
21 सितम्बर, रविवार
क्या AI साहित्यिक लेखन का विकल्प हो सकता है?

नई पीढ़ी का AI कितना आगे बढ़ चुका है?

विजेन्द्र एस विज, सूरज प्रकाश डड़सेना, प्रकृति करगेती, पूजा उपाध्याय

15:10 से 15:40
21 सितम्बर, रविवार
एक अनाम पत्ती का स्मारक

नरेश सक्सेना के नए कविता-संग्रह 'एक अनाम पत्ती का स्मारक' का लोकार्पण एवं चर्चा

रमेश अनुपम, नरेश सक्सेना

15:40 से 16:20
21 सितम्बर, रविवार
न लिख पाने की बेचैनी

क्या लेखक के लिए लगातार लिखना अनिवार्य है?

राकेश कायस्थ, विजयश्री तनवीर, यतीश कुमार, संगीता मनराल

16:20 से 16:35
21 सितम्बर, रविवार
‘नीली गली, बारिश और आल्हा’ का विमोचन

श्रद्धा थवाईत के कहानी-संग्रह ‘नीली गली, बारिश और आल्हा’ का लोकार्पण

16:35 से 17:05
21 सितम्बर, रविवार
नई वाली हिंदी : प्रवृत्ति और पहचान

भाषा, स्टाइल और पाठक–लेखक के रिश्ते पर चर्चा
नीलोत्पल मृणाल

17:05से 17:50
21 सितम्बर, रविवार
चोला माटी के राम

लोकगीत के रंग
पूनम विराट और साथी

17:50 से 18:40
21 सितम्बर, रविवार
बेस्टसेलर : नाम का जादू या बिक्री का सच?

हर किताब जिसे बेस्टसेलर कहा जाता है, क्या वह सच में पाठकों की पसंद बनती है? प्रकाशन की राजनीति और बाज़ार की हकीकत। प्रश्नोत्तर।

दिव्य प्रकाश दुबे

18:40 से 19:10
21 सितम्बर, रविवार
परदे और पन्ने

बॉलीवुड के लेखक वैभव विशाल से सिनेमा और साहित्य के रिश्तों पर कृष्णकांत जोन्नलगड्डा की बातचीत

19:10 से 20:10
21 सितम्बर, रविवार
गाँव-देहात का बड़ा परदा

फ़ैसल मलिक से गौरव गिरिजा शुक्ला की बातचीत

20:10 से 22:00
21 सितम्बर, रविवार
भई राहगीर ये तुम किस गाड़ी पे चढ़ गए

राहगीर