मुख्य अतिथि के साथ उत्सव का शुभारंभ होगा।
हिन्दवी की प्रस्तुति
बाबुषा कोहली, आनंद बहादुर, नरेश सक्सेना, आलोक आज़ाद
रामनामी समुदाय द्वारा
शाश्वत गोपाल
विनोद कुमार शुक्ल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित वृत्तचित्र के एक अंश की स्क्रीनिंग
आलोक पुतुल, देवेन्द्र शुक्ल
एक दलित की आत्मकथा
सरवर कुमार चहल से राकेश कुमार सिंह की बातचीत
हिमांशु गुप्ता ‘सहर’ के पहले कविता-संग्रह ‘सहर’ का लोकार्पण
नए पाठकों और डिजिटल युग में कविता-संग्रहों की बढ़ती लोकप्रियता
पूजा राय, रोहित कुमार, मुकेश कुमार सिन्हा, अंकुश कुमार
विनोद कुमार शुक्ल के कहानी-संग्रह ‘कहानियों का कहानियाँना’ का लोकार्पण
छह महीनों में 30 लाख — हिंदी साहित्य में संभव हुआ असंभव
नरेश सक्सेना, विनोद कुमार शुक्ल
क्या हिंदी में बाहर से आए लेखक ही सबसे नया और ताज़ा लिख रहे हैं?
सुशील कुमार, आनंद कश्यप, अश्वनी प्रताप, मानस भारद्वाज
संजीव बख्शी के उपन्यास ‘गाँव खेड़ा मौहाभाठा’ का लोकार्पण
चेतन देवांगन एवं साथी
सस्पेंस और रहस्य का बदलता स्वाद — हिंदी पाठकों की पसंद
जयंती रंगनाथन, रणविजय, के डी सिंह, संजय शेफ़र्ड
क्यों आ गई हैं राइटिंग वर्कशॉप की बाढ़
मोहित, हेना नकवी, विनीता अस्थाना, कोशलेन्द्र मिश्र, लोकेश गुलयानी
शब्द और सुर
चिन्मयी त्रिपाठी, जोएल मुखर्जी
प्यार में हल्ला बोल
रितेश रजवाड़ा
डिकोडिंग द डिवाइड
नीलोत्पल मृणाल
क्या इंस्टाग्राम और यूट्यूब हिंदी साहित्य के नए पुस्तक मेले हैं?
अर्पित आर्या, रेणु मिश्रा, मधु चतुर्वेदी, उज्ज्वल मल्हावनी
कैसे महिलाएँ लेखन को जीवन और ज़िम्मेदारियों के साथ गूँथती हैं
सुषमा गुप्ता, अंकिता जैन, चित्रा पंवार, ज्योति शर्मा, मुदिता शर्मा
अचल मिश्रा, निहाल पराशर
रील्स और शॉर्ट वीडियो के ज़माने में साहित्य की नई यात्रा
अंजली मिश्रा, सर्वेन्द्र विक्रम सिंह, पूनम पूर्णाश्री, शिवोहम
छत्तीसगढ़ी सिनेमा — कहाँ से चले, कहाँ तक पहुँचे, कहाँ जा रहे हैं?
मनोज वर्मा, ऋचा ठाकुर, मीर अली मीर, गौरव गिरिजा शुक्ला
नई पीढ़ी का AI कितना आगे बढ़ चुका है?
विजेन्द्र एस विज, सूरज प्रकाश डड़सेना, प्रकृति करगेती, पूजा उपाध्याय
नरेश सक्सेना के नए कविता-संग्रह 'एक अनाम पत्ती का स्मारक' का लोकार्पण एवं चर्चा
रमेश अनुपम, नरेश सक्सेना
क्या लेखक के लिए लगातार लिखना अनिवार्य है?
राकेश कायस्थ, विजयश्री तनवीर, यतीश कुमार, संगीता मनराल
श्रद्धा थवाईत के कहानी-संग्रह ‘नीली गली, बारिश और आल्हा’ का लोकार्पण
भाषा, स्टाइल और पाठक–लेखक के रिश्ते पर चर्चा
नीलोत्पल मृणाल
लोकगीत के रंग
पूनम विराट और साथी
हर किताब जिसे बेस्टसेलर कहा जाता है, क्या वह सच में पाठकों की पसंद बनती है? प्रकाशन की राजनीति और बाज़ार की हकीकत। प्रश्नोत्तर।
दिव्य प्रकाश दुबे
बॉलीवुड के लेखक वैभव विशाल से सिनेमा और साहित्य के रिश्तों पर कृष्णकांत जोन्नलगड्डा की बातचीत
फ़ैसल मलिक से गौरव गिरिजा शुक्ला की बातचीत
राहगीर