बेगूसराय (बिहार) में जन्मे, देवघर (झारखंड) से शिक्षित व दिल्ली निवासी मुकेश कुमार सिन्हा का ब्लॉग ‘जिंदगी की राहें’ ख़ूब चर्चित रहा है जिसे एक मिलियन व्यूअर्स ने सराहा। उनकी किताबों में ‘…है न!’ ‘हमिंगबर्ड’ (कविता संग्रह) व ‘लाल फ्रॉक वाली लड़की’ (लप्रेक) शामिल है। इसके अलावा उन्होंने आठ साझा कविता संग्रहों का संपादन भी किया है। अपने सरकारी नौकरी के दौरान शौक़िया तौर पर विज्ञान व प्रेम के घालमेल से लिखते हुए मुकेश ने अपना अलग साहित्यिक आसमान गढ़ा है। ‘गूँज : अभिव्यक्ति दिल की’ के संस्थापक भी हैं, जो पिछले दस वर्षों से साहित्य से जुड़े कार्यक्रमों में दख़ल रखती है।
अब तक उन्हें कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं जिनमें वर्ष 2011 में तस्लीम परिकल्पना ब्लोगोत्सव (अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर्स एसोसिएशन) द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ युवा कवि’ का पुरस्कार, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ से हिंदी सेवा के लिए 2014 में ‘विद्या वाचस्पति’ दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फ़ेस्टिवल 2015 में ‘पोएट ऑफ़ द इयर’ का अवॉर्ड (उप मुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया से प्राप्त) और कविता संग्रह ‘…है न!’ को जयपुर साहित्य संगीति द्वारा 2022-23 के लिए ‘जयपुर साहित्य सम्मान’ 2023 प्रमुख हैं।