बोलती-बतियाती भाषा में बड़ी कहानी कहने का हुनर राकेश कायस्थ को मौजूदा दौर के लोकप्रिय लेखकों की क़तार में शामिल करता है। मुख्यधारा की पत्रकारिता में लंबा समय बिता चुके राकेश ठेठ देहाती दुनिया से लेकर चकाचौंध भरी महानगरीय ज़िंदगी तक पूरे देश और परिवेश को समग्रता में समझते हैं। इनका क्रिएटिव कैनवस काफ़ी बड़ा है। न्यूज़ चैनलों पर राजनीतिक व्यंग्य आधारित कार्यक्रमों को विस्तार देने से लेकर, डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म मेकिंग, ऑडिबल की चर्चित सीरीज़ `दिल लोकल’ और ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों की स्क्रिप्टिंग सरीखे कई काम इनके खाते में दर्ज हैं।
चर्चित व्यंग्य-संग्रह ‘कोस-कोस शब्दकोश’ और फ़ैंटेसी नॉवेल ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’ के बाद ‘रामभक्त रंगबाज़’ इनकी नई किताब है। हिंदी की परंपरागत सीमाओं से परे जाकर इस किताब ने हर जगह प्रशंसा बटोरी है। ओपन मैगजीन ने इसे अंग्रेजी समेत तमाम भारतीय भाषाओं में लिखी गई 2022 की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में रखा है, तो वहीं हिंदुस्तान टाइम्स ने भी बुक ऑफ द ईयर करार दिया है। ‘1990, आरामगंज’ नाम से प्रकाशित रामभक्त रंगबाज के अंग्रेजी संस्करण ने भी पर्याप्त चर्चा बटोरी है।