सुभाष चंद्र कुशवाहा

सुभाष चंद्र कुशवाहा
MANAGEMENT SKILL
85%
BUSINESS SKILL
85%
MARKETING SKILL
85%

उत्तरप्रदेश के कुशीनगर जनपद में 1961 में जन्म। विज्ञान से स्नातकोत्तर। विगत तीन दशकों से हिंदी कथा साहित्य में हस्तक्षेप।

अब तक तीन कविता-संग्रह— ‘आशा’, ‘क़ैद में है ज़िंदगी’, ‘गाँव हुए बेगाने अब’; पाँच कहानी-संग्रह— ‘हाकिम सराय का आख़िरी आदमी’, ‘बूचड़ख़ाना’, ‘होशियारी खटक रही है’, ‘लाला हरपाल के जूते’, ‘लाल बत्ती और गुलेल’; कबीर पर शोधात्मक पुस्तक— ‘कबीर हैं कि मरते नहीं’, इतिहास पर— ‘चौरी चौरा : विद्रोह और स्वाधीनता आंदोलन’, ‘अवध का किसान विद्रोह (1920-22)’, भील विद्रोह: संघर्ष के सवा सौ साल; ‘टंट्या भील : द ग्रेट इंडियन मूनलाइटर’, ‘चौरी चौरा पर औपनिवेशिक न्याय’; छह संपादित पुस्तकें— ‘कथा में गाँव’, ‘जातिदंश की कहानियाँ’, ‘लोकरंग-1’, ‘लोकरंग-2’, ‘लोकरंग-3’, ‘लोकरंग-4’ ; प्रेमचंद की बहुजन कहानियाँ प्रकाशित। कथादेश पत्रिका के किसान विशेषांक, ‘किसान जीवन का यथार्थः एक फ़ोकस’ का संपादन। वर्ष 1998 से लोकरंग पत्रिका का संपादन। प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में 350 के लगभग आलेख।

‘सृजन सम्मान’, ‘प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान’, ‘18वाँ आचार्य निरंजननाथ सम्मान 2016’